श्री राम स्तुति
Posted March 26th, 2010 by umesh sharma
श्री राम चन्द्र कृपालु भजमन हरण भव भय दारूणम।
नव कंज लोचन कंज मुख कर कंज पद कंजारूणमऽऽ
कंदर्प अगणित अमित छवि नवनील नीरद सुंदरम।
पटपीत मानहु तडित रूचि शुचि नौमि जनकसुतावरमऽऽ
भज दीनबन्धु दिनेश दानव दैत्यवंशनिकंदनम।
रघुनंद आनंदकंद कौशलचंद दशरथनंदनमऽऽ
सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारू उदारू अंगविभूषणम।
आजानुभुज शरचाप धर संग्रामजित खरदूषणमऽऽ
इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनम।
मम हृदयकुंज निवास कुरू कामादि खलदल गंजनमऽऽ
_ तुलसीदास
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