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श्री राम स्तुति
Posted March 26th, 2010 by umesh sharmaश्री राम चन्द्र कृपालु भजमन हरण भव भय दारूणम।
नव कंज लोचन कंज मुख कर कंज पद कंजारूणमऽऽ
कंदर्प अगणित अमित छवि नवनील नीरद सुंदरम।
पटपीत मानहु तडित रूचि शुचि नौमि जनकसुतावरमऽऽ
भज दीनबन्धु दिनेश दानव दैत्यवंशनिकंदनम।
रघुनंद आनंदकंद कौशलचंद दशरथनंदनमऽऽ
सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारू उदारू अंगविभूषणम।
आजानुभुज शरचाप धर संग्रामजित खरदूषणमऽऽ
इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनम।
मम हृदयकुंज निवास कुरू कामादि खलदल गंजनमऽऽ
_ तुलसीदास
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गायत्री मंत्र का वर्णं
Posted March 16th, 2010 by umesh sharmaॐ भूर्भुवः स्वः
तत्सवितुर्वरेण्यं
भर्गो देवस्यः धीमहि
धियो यो नः प्रचोदयात्
गायत्री मंत्र संक्षेप में
गायत्री मंत्र (वेद ग्रंथ की माता) को हिन्दू धर्म में सबसे उत्तम मंत्र माना जाता है. यह मंत्र हमें ज्ञान प्रदान करता है. इस मंत्र का मतलब है - हे प्रभु, क्रिपा करके हमारी बुद्धि को उजाला प्रदान कीजिये और हमें धर्म का सही रास्ता दिखाईये. यह मंत्र सूर्य देवता (सवितुर) के लिये प्रार्थना रूप से भी माना जाता है
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Happy Chaitra Navratri 2010
Posted March 16th, 2010 by umesh sharmaHappy Chaitra Navratri 2010 to all Chhattisgarhi Brahmins and all Chhattisgarhiya.
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Chhattisgarhi SMS
Posted November 16th, 2009 by umesh sharmaSable Badiya CHHATTISGARIYA
I Love My Chhattisgarh
"Tor mor yari
jaise machisau kadi,
jaise rapa au kudari,
jaise doctor au bimari,
jaise raddi au kbadi,
jaise tetka au badi,
Samjhe Sangwari!..."
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गणेश चतुर्थी पर विशेष, वर्जित है चंद्रमा के दर्शन
Posted August 23rd, 2009 by umesh sharmaभाद्रपद्र शुक्ल की चतुर्थी ही गणेश चतुर्थी कहलाती है । श्री गणोश विध्न विनाशक है । इन्हें देव समाज में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है । भाद्रपद्र कृष्ण चतुर्थी को गणेश जी की उत्पत्ति हुई थी, उनका गजानन रुप में जन्म भाद्रपद शुक्ल चौथ को हुआ ।
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ब्राह्मण कौन
Posted August 23rd, 2009 by umesh sharmaआज मानव समाज में ब्राह्मण समाज का अपना अलग महत्व है, लेकिन चिन्तनशील ब्राह्मणों में यह प्रश्न बार-बार उठ रहा है कि आज के बदलते परिवेश में ब्राह्मण को ब्राह्मणत्व का बोध होना अति आवश्यक है ।
मेरे विचारों में बार-बार यह बात गुंजती है कि ब्राह्मण चरित्र आचरण व्यवहार कर्मवाणी के उच्च मापदंडों पर खरा उतरे । अर्थात चरित्र से सुन्दर एवं निष्कलंक हो । आचरण से विवेकी पारखी संतों की तरह आत्म बोध से परिपूर्ण हो और व्यवहार से मधुर विनम्र सरल एवं सहज हो । एवं वाणी से मुदृभाषी हो ।
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