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Guru
Posted October 29th, 2009 by umesh sharmaगुरु पद रज मृदु मंजुल अंजन । नयन अमिअ दृग दोष बिभंजन ॥
तेहिं करि बिमल बिबेक बिलोचन । बरनउँ राम चरित भव मोचन ॥१॥
बंदउँ प्रथम महीसुर चरना । मोह जनित संसय सब हरना ॥
सुजन समाज सकल गुन खानी । करउँ प्रनाम सप्रेम सुबानी ॥२॥
साधु चरित सुभ चरित कपासू । निरस बिसद गुनमय फल जासू ॥
जो सहि दुख परछिद्र दुरावा । बंदनीय जेहिं जग जस पावा ॥३॥
मुद मंगलमय संत समाजू । जो जग जंगम तीरथराजू ॥
राम भक्ति जहँ सुरसरि धारा । सरसइ ब्रह्म बिचार प्रचारा ॥४॥
बिधि निषेधमय कलि मल हरनी । करम कथा रबिनंदनि बरनी ॥
हरि हर कथा बिराजति बेनी । सुनत सकल मुद मंगल देनी ॥५॥
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छत्तीसगढ़ नई सदी में ...
Posted August 23rd, 2009 by umesh sharmaअपार संभावनाओं एवं समस्याओं से घिरे हुए छत्तीसगढ़ का भविष्य किसी ज्योतिषी से कूंडली मिलाने से और न ही कंम्प्यूटर इंटरनेट से बनेगा । छत्तीसगढ़ का भविष्य छत्तीसगढ़ लोगों के हाथ की बात है । विकास की आज सर्वमान्य नीति भूमंडलीकरण वैश्वीेकरण या उदारीकरण माना जाता है ।
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गणपति वंदना
Posted August 23rd, 2009 by umesh sharmaगणपति अग्रदेव हैं जिन्होंने हर काल में अलग - अलग अवतार लिया है । उनकी शारीरिक संरचना के भी मिश्रित अर्थ हैं । शिव मानस पूजा में उन्हें प्रवण ऊँ कहा गया है । इस ब्र्म्हा अक्षर में मस्तक भाग श्री गणेश का और नीचे का भाग उदर चंद्र बिन्दु लड्डू और मात्रा सूड़ के समान है । चारों दिशाओं में सर्वव्यापकता की प्रतीक उनकी चार भुजाएं हैं । वे लंबोदर हैं, चराचर श्रृष्टि उनके उदर में विचरित करती है बड़े कान उनकी अधिक ग्राह्य शक्ति एवं छोटी पैनी तेज सूक्ष्म ऑंखे तीक्ष्ण दृष्टि की सूचक हैं । उनकी नाक महा बुध्दित्व का प्रतीक है ।
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